LIFE

Our life is like a song ,
What is right and what is wrong,
We never get to know,
Sad and happy, fast and slow,
In a life time we meet them in one go,
It’s like a rainbow,
There are times when the colours are bright,
Sometimes there is dark night,
Sometimes we have to be stern
And sometimes we have to bow ,
It’s like a ship which in all condition has to row,
No matter how it’s to and fro ,
We are here to just go go go and go….

” नारी “

कोमल है कमजोर नहीं पर शक्ति का नाम ही नारी है!!!!

नारी कौन है ? नारी क्या है ? नारी कैसी है ?

यह सवाल सोचने योग्य हैं, पर क्या हम सोच पाते हैं?
हम सिर्फ नारी को भोग की वस्तु ,उपयोग की वस्तु ही समझते हैं, हम सिर्फ नारी को बेटी ,बहन,बीवी और मां ही समझते हैं । नारी इन नामों से कहीं अधिक है , वह एक सक्षम और सम्पूर्ण व्यक्तिव है ।
केवल आज से ही नहीं नारी सदियों से अलग अलग तरह से जानी गई है, अलग-अलग नामों से पहचानी गई है, पर हम समझना नहीं चाहते । क्या द्रौपदी सखी नहीं थीं भगवान कृष्ण की ?? सक्षम भी थीं और संघर्ष भी करती थीं, वह अपने पांच पतियों को आदर और प्रेम सहित सलाह भी देती थीं, वह उनकी प्रेरणा थीं, वह समाज के लिए एक उदाहरण बनीं ,उन्होंने उस युग में भी हर स्त्री को सिखाया कि अगर तुम पर कोई अत्याचार होता है तो चुप मत बैठो आवाज उठाओ और प्रतिकार करो।
आज की नारी भी सक्षम , संघर्षरत और सलाहकार है। आज की नारी घर ,दफ्तर और यहां तक कि देश भी चलाना जानती है। परन्तु आज भी अधिकांश घरों में नारी के साथ दुर्व्यवहार होता है । आज नारी के इतनी शक्तिशाली और प्रतिभाशाली होने के बावजूद भी उसकी आवाज दबा दी जाती है , उसे मजबूर किया जाता है चुप रहने के लिए । आज के इस आधुनिक युग में भी 70% लोग नारी को किसी न किसी प्रकार से उपभोग की ही वस्तु मानते हैं । धरेलू हिंसा गांवों में ही नहीं आधुनिक शहरों में भी आम बात हो गई है । देवी मां की तो हर कोई पूजा करता है क्या वह नारी नहीं ? आज की नारी भक्ति नहीं चाहती वह केवल सम्मान की अभिलाषी है । वह परिवार की सुदृढ़ नींव भी है और उसकी धुरी भी , वह कोमल भी है और जरूरत पड़ने पर कठोर भी ।

नारी का जीवन केवल व्यतिक्रम,
नारी का जीवन केवल भ्रम,
एक ओर दुशासन खड़ा हुआ ,
एक ओर मेरी अग्नि परीक्षा ,
समाज को शिक्षा देने को ,
क्यों मेरा उपयोग हुआ ??
मैं कहीं नहीं अधनातन थी ,
मैं नारी नहीं मैं साधन थी ,
मैं नारी नहीं मैं साधन थी ??

अब उन तीन सवालों पर आपका ध्यान केंद्रित करना चाहती हूं जो मैंने सर्वप्रथम आपके समक्ष रखे थे ,
नारी क्या है – जो कभी ना हारी वह है नारी ।
नारी कौन है – नारी शक्ति है ।
नारी कैसी है – नारी भावनाओं का महासागर है ।
यदि आज का नर कभी ना हारी इस शक्ति की भावनाओं के महासागर को समझ लेता है तो जीवन कितना सुखद होगा । जीवन जीना सरल हो जाएगा । जरा सोचिए!!!!!
-ऋतु

“DON’T JUDGE US”

Why we are being judged
by our mien ?
We are not presentable,
if we are plumpy,
If we are timid ,
we are grumpy
If we are lean ,
Oh ! you will blow with the wind ,
If we are dark ,
We are termed as stark .

Excuse me….

We are happy with our own self ,
We are not Delph .
Which you can smash ,
We are not a piece of trash.
Now we care a damn ,
We hate to be sham .
Leave us or love us ,
Kindly don’t judge us…..

“आज की शिक्षा “

आजकल बच्चों की शिक्षा ही सर्वोपरि विषय बन गया है , स्कूल , कॉलेज की फीस और ऑनलाइन क्लासेस बस यही चर्चा है । स्थिति का कोई भी निष्कर्ष निकालकर निर्देश दिए जा रहे है । बहुत से लोग अलग-अलग माध्यम से अपनी राय दे रहे हैं, वैसे भी सलाह देना तो भारतीयों का जन्म सिद्ध अधिकार है , चाहे किसी बात का ज्ञान हो या ना हो सलाह देने में हम सर्वोपरि रहते हैं, क्योंकि यही तो एक चीज है जिस के दाम नहीं लगते ‌।
स्कूल को शिक्षा मंदिर कहा गया है , आज के परिपेक्ष में क्या यह सही है ? क्या अध्यापकों की मनमानी सही है ? क्या अभिभावकों की मनमानी सही है?क्या सरकारों का हस्तक्षेप करना जरूरी नहीं ? क्या शिक्षा को एक पैसा कमाने का जरिया बनाना सही है ?
आप कहेंगे ऐसा तो सदियों से चला रहा है , परंतु आज के इस दौर में यह तथाकथित शिक्षा मंदिर सिर्फ अपने फायदे के बारे में सोच रहे हैं । यदि यह कुछ माह की फीस नहीं लेंगे तो क्या यह संस्थान बंद हो जाएंगे ? इतने सालों से आप इतना पैसा कमा रहे हैं अगर आप निशुल्क शिक्षा प्रदान करेंगे तो क्या आपका ज्ञान खत्म हो जाएगा ? समय की मांग के अनुसार अगर अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ ना डालकर बच्चों की पढ़ाई अपने ही स्कूल के कोष ( जो कि अभिभावकों द्वारा ही लिया जाता है )से करवा देंगे तो क्या भूचाल आ जाएगा ? किसी को भी परवाह है बच्चों की ? अभिभावकों पर भी यही दबाव रहता है कि इतना पैसा खर्च कर रहे हैं तो बच्चा हमारी मर्जी से पढ़ें कुछ बने , क्या यह गलत नहीं ?
यह सब जिनके लिए किया जा रहा है क्या किसी ने उन बच्चों की राय , इच्छा और खुशी जानने की कोशिश की?आज भारतीय बच्चों पर पढ़ाई का इतना बोझ है परिवार की इतनी अपेक्षाएं हैं कि वह कई बार गलत पथ पर निकल जाते हैं , कुछ मानसिक दबाव झेल लेते हैं और कुछ अपनी जीवन लीला ही समाप्त करना सरल समझते हैं, क्या उसमें हमारा कसूर नहीं ? कहा जाता है,

“बच्चे भविष्य की नींव है”

परंतु हम उन्हीं के साथ खिलवाड़ करते हैं। अभिभावक अपने सपने बच्चों पर थोपते हैं , लोगों को दिखाने के लिए बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाया जाता है , बच्चे का मन अगर कलम पकड़ने का और लेखन करने का है तो वह छीन कर उसे स्टैथोस्कोप थमाया जाता है । अध्यापक भी बच्चों पर यही दबाव बनाते हैं कि अच्छे नंबर नहीं लाओगे तो कुछ नहीं कर पाओगे । प्रत्येक बच्चा क्या एक समान होता है ?
आज भारतीय बच्चे विदेशों में जाकर पढ़ना क्यों चाहते हैं?
वहां पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ नहीं है, बच्चों की इच्छाओं के अनुरूप पाठ्यक्रम बनाए जाते हैं , केवल चार पांच विषय बच्चों की रुचि के अनुसार ही पढ़ाए जाते हैं , पढ़ाई को थोपा नहीं जाता। शिक्षा से मित्रता सिखाई जाती है ।
यूं तो हम काफी आधुनिक हो गए हैं, हमें पाश्चात्य देशों से काफी कुछ अपनाया परंतु अपनी मर्जी के मुताबिक। वहां का खाना, व्यंजन , पहनावा, कार्यप्रणाली, प्रौद्योगिकी।
परंतु हम अत्यावश्यक बात अपनाना तो भूल ही गए।
वह क्या है?
वह है हमारे देश के बच्चों के भविष्य एवं शिक्षा के पथ पर उठाए गए कदम । यदि हम अपनी संतानों का उज्जवल भविष्य चाहते हैं तो आज एक नई कार्यप्रणाली की आवश्यकता है , अभिभावकों और अध्यापकों को एकजुट होकर अपने बच्चों के लिए कुछ निर्णय लेने होंगे, नूतन विषय लाने होंगे, पढ़ाई को बोझ ना बनाकर मनोरंजक बनाना होगा।
जहां कुछ बच्चे आज अपनी रुचि को अपना कर आगे बढ़ रहे हैं जैसे कि कुछ गायकी और लेखन कर रहे हैं, कुछ यूट्यूबर और ब्लागर हैं , परंतु 80% बच्चे आज भी अपने माता-पिता और समाज की अपेक्षाओं की बलि चढ़ अपनी इच्छाओं के विपरीत कार्य कर रहे हैं। आज आवश्यकता है सब को एकजुट होकर बच्चों का भविष्य संवारने की । याद रहे बच्चों को केवल साथ की आवश्यकता होती है रास्ता वह खुद ही ढूंढ लेते हैं, उन्हें केवल विश्वास की आवश्यकता है मंजिल वह स्वयं ही प्राप्त कर लेते हैं । उनकी चंचलता और निश्चलता को सजीव रखने के लिए उनका मार्गदर्शन करें, उनकी इच्छाओं और भावनाओं का सम्मान करें। अपनी जीवन भर की इस पूंजी को बिखरने ना दें ।

” किसी ने भी अभी तक पूरी तरह से बच्चे की आत्मा में छुपे सहानुभूति, दया और उदारता के खजाने को नहीं जाना है। वास्तविक शिक्षा का प्रयास उस खजाने को खोलना होना चाहिए “

“CRUNCHY ULJHAN”

Friends I want to tell u about my passion other than writing and that’s’ COOKING’. I love to cook a lot of cuisines in different styles with a tinch of my creativity ,but initially it was not like that as I was married at 18 and cooking was altogether a biggest fear for me. I considered it as my responsibility and started cooking without putting my heart in it until I heard a saying in Hindi ,

“जब दिल से कुछ पकता है तो दिल तक पहुंचता है और तृप्त करता है ।”

I grasped that mantra .It helped exploring a chef in me. Now cooking became my hobby and I started enjoying it.As time went by I was appreciated for my cooking skills.It made me more confident and I tried my hands on different recipes . I started mending dishes. As they say,

“The one who fixes the spoiled food is a cook”

One fine day few guests n family were on the breakfast table and my servant spoiled a simple dish “Poha”.

Though we had a lot of things to eat but to waste a huge amount of Poha was my concern and how can I serve d spoiled dish??
My chef cap tickled with an idea and I prepared a snack using that poha .After tasting it everybody started assuming the ingredients .Their normal discussion switched off to the ingredients of ‘The new snack’ as I belong to a foody family . My smile got wider n I was conteded as they relished it. Today I will share that recipe which had a vast discussion without result .
So here we go..

Ingredients ::

Cooked veg poha: one bowl
Boiled potatoes:3 to 4
Green chillies:1 to 2
Corriander leaves:5to 6
Salt:as per taste
Chilli powder:1/4th tsp
Oregano:1/4th tsp
Dry corriander powder:1/4th tsp
Oil for frying

How to cook::

Take cooked poha and grind it in the mixer, add peeled potatoes and give them a churn as well. Now take out the batter from the mixer in a bowl. Add all the spices ,chilles and coriander leaves….. Make a dough ….Now grease your palms with little oil and take a portion of the batter and roll it between your palms like a ball… After making all the balls slightly flatten them and keep it in the refrigerator for half an hour. Now take out the balls and fry Dem on medium flame.. Serve hot with tomato ketchup and mint chutney…. Enjoy your snack..
This is a recipe from a home maker. You can give it a suitable name as per your choice but I named it “CRUNCHY ULJHAN”.

“Neophyte became a Culinarian”

“तस्वीरें”

तस्वीरें खामोश रहकर भी बहुत कुछ कह जाती हैं,
यह जिंदगी के बीते पलों को समेट लाती हैं ।
जब भी इन्हें उठा कर देख लो,
ये हमें कुछ ना कुछ बताती हैं,
हमारे ही बीते दिनों की कहानी हमें ही सुनाती हैं।
कभी आंखों में चमक ,
कभी होठों पर मुस्कान दे जाती हैं,
कुछ खट्टी कुछ मीठी यादों को ताजा कर जाती हैं।
कभी बचपन से मिलवा जाती हैं,
कभी जवानी से रूबरू कराती हैं।
जीवन के कई किस्सों को ,
हमारे ही कई हिस्सों को,
हमसे ही मिलवा जाती है ।
इस भाग दौड़ भरी दुनिया में,
हमारी थकन को कम कर जाती है ।
हमारी नीरस सी जिंदगी में ,
कुछ रंग मतवाले से बिखरा जाती हैं ।
कुछ छूटे रिश्तों को ,
कुछ रूठे चेहरों को फिर से मिलवाती हैं ।
कभी-कभी इन्हें देख कर,
आंखें भी भर आती हैं ।
पहले ढूंढने में मेहनत लगती थी ,
अब तो एक स्पृश से ही आ जाती हैं ।
ये तस्वीरें …….
खामोश रहकर भी बहुत कुछ कह जाती हैं,
बहुत कुछ कह जाती है!!!

WHO AM I ??

Who am I ?
I am a bird whose wings are chopped ,
I am a picture that is cropped ,
Only to satisfy others ??

Who am I ?
I am a musical note which is lost,
I am a jewel without any cost,
Only to please others ??

It can not happen now,
I will not allow,

I want to fly,
I want to enjoy,
I want to be heard,
I want to be loved….

In this vast world ,
I want a petite space,
I want solace ,
I don’t want to chase…..

I want to breathe,
Breathe in the air which is pure,
I want to know myself
The way I haven’t before……

I want to b like a sea shore,
That loves to be with its waves,
I want to explore,
I don’t want anything more……

You can never loose hope,
You just have to try,
To find the answer for
Who am I ??

जिंदगी

कुछ कविताएं जिंदगी की नजर !!


क्यों जिंदगी की राहें उलझ जाती हैं,
क्यों सीधा-सीधा चलते भी मंजिलें बिछड़ जाती हैं,
क्यों जो अपने लगते हैं, बेगाने हो जाते हैं,
क्यों अपने ही चेहरे अनजाने हो जाते हैं,
जिन पर कभी नाज था क्यों वो बेमाने हो जाते हैं,,
कुछ सवालों का जवाब ढूंढती जिंदगी में,
क्यों आंखें नम हो जाती है,
क्यों जिंदगी की राहें उलझ जाती हैं,
क्यों सीधा सीधा चलते भी मंजिलें बिछड़ जाती हैं????????

जिंदगी अबूझ पहेली सी है,
जैसी भी है एक सहेली सी है।
खुशी और गम में साथ देती है,
कभी मुश्किल में फंसाती ,
कभी हर मुश्किल से निकाल लेती है।
कभी विचारों का मंथन कराती ,
कभी उन्हीं विचारों के भंवर से निकाल लेती है।
और कोई दे ना दे जिंदगी जरूर साथ देती है।
कभी नरम तो कभी हठीली सी है,
कभी भीड़ तो कभी अकेली सी है।
जिंदगी अबूझ पहेली सी है ,
जैसी भी है एक सहेली सी है!!

जिंदगी के फलसफे भी अजीब होते हैं,
कभी हम किसी के और कभी किसी के करीब होते हैं,
कोई हमसफ़र हमेशा साथ चले ये भी नसीब होते हैं,
कोई रिश्तों से अमीर तो कोई गरीब होते हैं,
कुछ ख्वाब अधूरे कुछ बेतरतीब होते हैं,
जिंदगी के फलसफे भी अजीब होते हैं।

कहते हैं कि इंतिहान लेना जिंदगी का काम है,
पर ये इतना कहां आसान है,
कहीं शिकवे कहीं शिकायतें,
कहीं प्यार कहीं मोहब्बतें,
फिर भी सब इससे अनजान है।
कौन कहता है जिंदगी बेजान है?
इसी जिंदगी में तो सिमटी सबकी जान है।
फिर क्या हुआ अगर यह इम्तिहान है,
जो हंसी खुशी बिताए इसे,
उसी का तो खिलता जहान है।
फिर क्या हुआ गर कोई परेशान है,
परेशानियों में ही तो खिलती मुस्कान है।
सुख नहीं रहा तो दुख भी नहीं रहेगा,
यही जिंदगी की पहचान है!!!

जिंदगी के मसलों को
खुरशीदे जस्त कर लो,
आफरीने हयात से थोड़ी तो उल्फत कर लो,
फ़िक्र ए फानी में तो मुश्त ए खाक हो जाओगे।
उश्शा़क न होंगे तो यूं ही बिखर जाओगे।
- ऋतु

आखिर क्यों ??

क्यों उसने ऐसे किया??
क्यों कोई ऐसे करता है??
सोच के दिल डरता है,
ऐसी क्या मजबूरी थी??
ऐसी क्या परेशानी थी??
क्षण भर के आक्रोश में,
भावनाओं के आवेग में,
इंसान कमजोर हो जाता है,
वह अकेला हो जाता है,
दौलत ,शोहरत ,इज्जत ,
तब कुछ काम ना आता है,
जब दिल बेजार हो जाता है,
किसी से बात करने का सोचा होता,
दिल हल्का करने का सोचा होता ,
अपनों पे भरोसा तो किया होता ,
कुछ पल और तू जिया होता,
अपनी परेशानियां खत्म करने को,
तूने सोचा ये समाधान,
मां-बाप ,परिवार के लिए,
है यह विषाद महान,
तुम तो बिल्कुल सक्षम थे,
फिर क्यों कदम उठाया ये,
अदाकार गजब के थे,
अदाकारी ही कर गए,
मन मेरा सोचने को मजबूर है,
जीवन यह क्षण भंगुर है,
कल क्या होगा पता नहीं,
किसी की इसमें खता नहीं,
चकाचौंध भरी दुनिया का,
एक सत्य उजागर होता है,
बाहर से दिखता कुछ और,
अंदर और कुछ होता है,
तेरा नाच और तेरा खेल,
ये भी तो तेरे साथी थे,
इन्हीं से कुछ पल बतियाता,
शायद मन शांति पा जाता ,
पर तू तो हिम्मत हार चुका था,
पहले ही खुद को मार चुका था,
बस एक खयाल यह आता है,
मन का दुख क्या इतना भर जाता है??
क्या और कोई रास्ता ना सूझ पाता है??
जो इंसान जिंदगी हार जाता है,
जो इंसान जिंदगी हार जाता है।

“मां की वर्षगांठ”

आज अपनी मां के जन्मदिवस पर आप सबसे अपने मन के भाव सांझा कर रही हूं ।

आज का दिन है कुछ खास,
मां को शुभकामनाएं देने का कर रहीं हूं प्रयास।
करना थोड़ा मुश्किल है,
क्योंकि वो मां का दिल है ।
उसी ने तो जन्म दिया,
उसी ने तो सक्षम किया ।
उसको क्या दे पाऊंगी,
उसके बिना कहां जाऊंगी ।
जिसने पग पग पर दिया है साथ,
कैसे मनाऊं उसकी वर्षगांठ ।
उस मां के आगे मैं हूं बहुत छोटी,
जिसकी हर सांस मेरे लिए है होती ।
समझौते ना जाने कितने किए होंगे,
मेरे लिए कितनी बार अश्रु बहे होंगे ।
मैंने बहुत सताया होगा,
कई बार रुलाया होगा ।
फिर भी चट्टान सी खड़ी होगी,
संकटों से भी ना डरी होगी ।

पूरी करने मेरी हर आस,
मां ही नहीं पिता बन कर चली है साथ ।‌

मेरे लेख भी उससे है, मेरी कविताएं भी,
मेरे शब्दों की प्रेरणा भी ।
मेरे वजूद में उसका एहसास,
उसी की दुआ ने बनाया मुझे खास ।
मेरे संस्कार ,मेरा व्यवहार देन है उसी की,
मेरी कला भी धरोहर है उसी की ।
ऐसी जननी को दूं कुछ खास,
जिसका हो कोमल एहसास,
यही है उस ‘विजय’ की ‘ऋतु’ का प्रयास !!

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