“पिता”

Ritu Jain

Its never too late to explore yourself

“पिता गीता के वो श्लोक हैं,

जिन्हें पढ़ते तो सब है,

समझते कम है……”

आज मैं आपसे उन्हीं पिता के बारे में बात करूंगी जिनके बारे में बहुत कम कहा जाता है। मां के बारे में तो सभी बात करते हैं। मां पूजनीय है, मां से बढ़कर कोई नहीं , परंतु पिता के अस्तित्व को भी हम नकार नहीं सकते। मां अगर प्यार की बहती नदी है तो पिता उस नदी पर सब्र और शांति का बांध हैं। नदी के प्रवाह में बहना हमें अच्छा लगता है पर बांध की अहमियत तब पता चलती है जब बांध में दरारें पड़ जाती हैं और हम लड़खड़ा जाते हैं।

पिता की डांट उस कड़क चाय के समान है जो हम सुबह पीकर दिन की शुरुआत करते हैं। यदि सुबह की चाय कड़क ना हो तो दिन अच्छा नहीं निकलता, वैसे ही यदि पिता की डांट ना हो तो दिन क्या जिंदगी अच्छी नहीं गुजरती। पिता तो वह आईना है जो हमें हमारा प्रतिबिंब दिखाता है, जो कभी झूठ नहीं बोलता, हमें हमारी कमियां दिखाता है, हमें हमसे मिलवाता है। उनकी डांट और सीख के बिना हम कुछ नहीं कर पाएंगे। वह हमें हवाई जहाज की सैर कराने के लिए मीलों लंबी पैदल यात्रा करते हैं, आज के इस माहौल में अगर पिता घर से बाहर नहीं निकल रहे तो केवल इसलिए कि वह परिवार और बच्चों को सुरक्षित रखना चाहते हैं , अपनी जिंदगी के बारे में तो वो सोचते ही नहीं ,हरआपदा से बच्चों को बचाने वाले पिता ही होते हैं ।पिता नारियल की तरह है अंदर से कोमल और बाहर से सख्त परंतु लाभदायक। वह एक पेड़ की तरह है जो खुद तो वर्षा और कड़कती धूप में खड़ा रहता है पर हमें छाया और रक्षण देता है। वह चंद्र के समान हमें शीतलता प्रदान करते हैं और सूर्य के समान हमें संसार के हर उजाले से अवगत कराते हैं ,परंतु हमें तो सिर्फ उनकी डांट और फटकार दिखाई देती है उनका प्यार और समर्पण नहीं।
वह अपना सुख तो हमसे बांटते हैं पर दुख अंदर ही समेट लेते हैं, जीवन भर हमारे लिए भागदौड़ करते हैं और मृत्यु के बाद भी हमारे लिए बहुत कुछ छोड़ कर जाते है जिससे हमें परेशानी ना हो, हम आराम से जी पाएं।
कहते हैं,
‘इंसान के जाने के बाद ही उसकी कदर होती है’
पिता के होने का महत्व उनसे पूछो जिनके सर पर उनका साया नहीं, जो उनके दो बोल को भी तरसते हैं। उनकी स्थिति बगीचे के उस फूल की तरह है जो बिना माली केे मुरझा जाता है।

मां के बलिदान तो हमें दिखते हैं परंतु पिता के बलिदानों को अनदेखा किया जाता है क्योंकि वह अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाते उनका प्यार हमारी फरमाइशों को पूरा करने में दिखता है, उनका ध्यान उनकी फटकार में दिखाई देता है पर हम समझ नहीं पाते। पिता हमें केवल नाम नहीं देते अपितु अपना सर्वस्व लुटा देते हैं, उन्हें सिर्फ प्यार और आदर चाहिए अपनी संतान से। वह हमारे बिना कहे हमारी इच्छाऐं पूरी कर देते हैं । हमें भी निस्वार्थ भावना से उनका साथ निभाना चाहिए। आज के युग में हम राम और श्रवण तो नहीं बन सकते पर अपने जन्मदाता के थकते कंधों को सहला सकते हैं, उनके कांपते हाथों को थाम सकते हैं और कह सकते हैं …..हम हैं।

ऋतु..

Posted byBeingcreativePosted inUncategorizedTags:आईनापितापेड़मांरामश्रवण4 Commentson “पिता”Edit“पिता”

“रिश्ते”

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“”रिश्ते होते हैं इस नाव की तरह जो समुंदर के बीच में खड़ी है, रिश्ते होते हैं इस समुंदर की तरह जो नाव को संभाले खड़े हैं!!””

हमारी जिंदगी में बहुत से रिश्ते होते हैं,कुछ हम जन्म से पहले ही बना लेते हैं ,कुछ जन्म के बाद बनते हैं और कुछ अपनी समझऔर सूझबूझ से हम बनाते हैं। हर रिश्ते का अपना एक रंग होता है और हर रिश्ते को निभाने का एक अलग ढंग होता है। जो रिश्ता परिवार वालों के साथ होता है उसे हम सरलता ,संयम और प्रेम से निभाते हैं, जो रिश्ता समाज के साथ होता है उसमें केवल सम्मान होता है, जैसा सम्मान हमें मिलता है वैसा ही सम्मान हम दूसरों को देते हैं। दोस्ती के रिश्ते में प्यार और अधिकार होता है, यह वह रिश्ता है जो हम अपने आप बनाते हैं और सारी जिंदगी निभाते हैं। कुछ अनकहे रिश्ते भी होते हैं जो केवल आत्मा से जुड़े होते हैं ,इन रिश्तो को हम नाम नहीं दे सकते ,इस रिश्ते में आयु की सीमा नहीं होती बड़े छोटे का भेद नहीं होता ,अमीर गरीब का भेद नहीं होती ,बस जो मन को अच्छा लगे वह अपना है, जिस से रूह का मेल हो वह अपना है ।यह रिश्ते सहेज के रखने वाले होते हैं क्योंकि हम इसमें ना सम्मान से बंधे हैं ना परिवार से बंधे हैं ,केवल बंधे हैं आत्मिक संतुष्टि और आत्मिक प्रसन्नता से,जब यह रिश्ते टूटते हैं तो दिल को ठेस लगती है। रिश्ते एक नाव की तरह हैं जो दुनिया रूपी सागर में हमें समेट कर खड़े हैं जो हमें समुंदर में डूबने नहीं देते और हमें समुंदर की थपेड़ों से बचाते हैं। रिश्तो को हम समंदर भी कह सकते हैं क्योंकि जैसे समुद्र में असंख्यात लहरें होती हैं वैसे ही जब हम जन्म लेते हैं तब से लेकर हमारे मरण तक हम असंख्यात रिश्ते बनाते हैं जो हमें तरह-तरह का पाठ पढ़ाते हैं , कुछ आगे बढ़ना सिखाते हैं कुछ जीवन के सही रंग दिखाते हैं,और कुछ कष्टों को झेलने में हमारे साथ निरंतर खड़े रहते हैं , साथ चलते रहते हैं। यह हमें देखना और सोचना है कि किन रिश्तो को आगे लेकर चलना है। ज्यादा रिश्तो के बोझ को उठाने से अच्छा है प्यार से कम रिश्तो को निभाया जाए।यदि हम प्यार से रिश्ते निभाएंगे फिर वह कम हो या ज्यादा हम हमेशा खुश रहेंगे , अगर हम खुश रहेंगे तो दूसरों को भी खुशी दे पाएंगे। आज की भागदौड़ भरी दुनिया में खुशी से जीना सबसे ज्यादा जरूरी है। तो चलो हम विश्लेषण करें कि हम कौन से रिश्तो से बंधे हैं और हमें कौन से रिश्तों को लेकर आगे बढ़ना है !!!

ऋतु…Posted byBeingcreativePosted inUncategorizedLeave a commenton “रिश्ते”Edit“रिश्ते”

“LOCK DOWN”

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“Time to change”

We are in lockdown since 23rd of March due to Corona.
Shops are open but for a limited time . Malls, restaurants, educational institutes are still in quarantine…
During this period we learnt a lot .All of us tried to keep ourselves busy by doing new things. Few of us became chefs, few have started writing, meditating, exercising ,singing and dancing… Everybody is trying to explore themselves. Men are helping in household chores but few are still lying on beds and sofas doing nothing and some very intelligent people are roaming out without any reason ,without thinking that this pandemic is very dangerous .These people think “let it be “. Governments , doctors , sanitization n police departments are working 24/7 .
Still few people are there to complain complain and only complain these people don’t appreciate even d homemakers who are working for their well being day and night … Why don’t they think that in this decisive situation we should help each other n stay bonded .We have to fight together for our survival ….
Cooking fancy dishes,making tik tok videos , watching Netflix and cribbing will not help us to come over the pandemic… This is the time to change ourselves and our country…. After this lockdown we must start other ones like we should try to lockdown are unnecessary wishes and demands ,avoidable travel ,worthless nagging ,useless hatred and redundant betrayal. If we want to help our nation we should peer support …

We should restrict our chase getting on for d sky… This won’t lead us anywhere except depression ,sorrow and dejection.
We lived a very simple n contended life behind closed doors , caring for our family members, caring for close ones ,can’t we live like that in future ??
We need slight food to survive ,we need a petite space to live and we need a little to thrive…
God imbued that he’s the only power
we are nobody…

“”Think what we have to give ,
Let’s make this world to live “”
Posted byBeingcreativePosted inUncategorizedLeave a commenton “LOCK DOWN”Edit“LOCK DOWN”

मां बेटी!!!

मां बेटी का रिश्ता सबसे खास होता है,

एक प्यारा सा अहसास होता है।।

बेटी होती है जब छोटी ,

मां ही उसकी दुनिया होती ।

उसे खिलौनों से ज़्यादा मां का आंचल है भाता , पहला शब्द तुतलाते हुए मां ही है निकल पाता ।

वो नन्हे कदमों से गिरते पड़ते मां तक पहुंच ही जाती ,

ये देख कर मां खुशी के आंसू छलकाती ।

मां आंसू तब भी बहाती ,जब बेटी पहली बार स्कूल है जाती ,

आंसूओं को तब भी रोक न पाती है जब बेटी कालेज में पहले स्थान पर है आती ,

बेटी तुनक के फट से कह जाती ,

कि मां तो हमेशा ही गंगा जमना है बहाती ।

मां की कोई बात अब उसे कहां थी सुहाती ,

अब उसकी दुनिया मां के आंचल में ना समाती ।

मां तो मां है हर हाल में बेटी के लिए प्राथना है करती, पर बेटी तो धीरे-धीरे मां को खुद से दूर है करती ।

मां फ़िर अपनी प्यार भरी आंखें हैं भिगाती , अब ख़ुशी के नहीं ग़म के आंसू है बहाती।

बेटी का परिवार है बढ़ता ,जीवन खुशियों से है भरता ,

छोटी सी गुड़िया के आने से ,घर आंगन है उसका खिलता।

बेटी के चलने पर भरती है जब वो अंखियां,

तब याद उसे आती है अपनी मां ,

मां का आंचल लगने लगा उसे फिर से दुनिया।

वो कुछ और सोच न पाती ,झट से मायके पहुंच जाती ,

मां को मुस्कराते हुए खड़ा है पाती ।

दौड़ के मां से लिपट जाती ,आंखों से ढेर आंसू छलकाती ,

ये क्या ??

मां की तस्वीर से माला है गिर जाती ,

बेटी अपनी गलती पर अब है पछताती ।

मां बन के ही वो मां को है समझ पाई ,

पर अब मां तो उसे छोड़कर बहुत दूर है चली गई । तस्वीर को कलेजे से लगाए वह फर्श पर ही गिर गई,

आज उसे मां की ममता बहुत याद आई।

मां मां कह के खूब है चिल्लाई,

आज उसन खुद है गंगा जमुना बहाई।

यूं ही समय की चक्की चलती जाती है,

हर मां खुशी और ग़म में,आंखों को भिगोती जाती है।यह रिश्ता ही ऐसा होता है ,

हर रिश्ता इसके आगे छोटा है।

मां बेटी का रिश्ता सबसे खास होता है,

एक प्यारा सा एहसास होता है।।

ऋतु…..Posted byBeingcreativePosted inUncategorized1 Commenton मां बेटी!!!Editमां बेटी!!!

“कसूर”

कुछ घटनाएं लिखने को मजबूर कर देती हैं,

कुछ घटनाएं आत्मा को झकझोर देती हैं।

कल हुई घटना ऐसी ही है,

क्या कसूर था उस गर्भवती हथिनी का,

क्या कसूर था उस अबोध बालक का।

वह तो अभी तक जन्मा भी ना था,

फिर उसके साथ ऐसा क्यों हुआ??

मां बनने की चाहत हथिनी का कुसूर था??

इस दुनिया में आना उस अजन्मे बच्चे का कुसूर था??

क्या भावनाएं सिर्फ इंसानों की होती हैं,

क्या जानवरों में भावनाएं नहीं??

जैसे एक औरत बच्चे को जन्म देने के लिए उत्साहित है होती ,

पशु भी तो होते हैं वैसे ही।

पर हम मनुष्य उन्हें समझ नहीं पाते,

उनके दर्द हमें दिख नहीं पाते।

यहां कसूर किसका था?

असामाजिक तत्वों की गंदी सोच का,

उस इंसान को दिए गए संस्कारों का।

जिसे यह सिखाया गया कि अपनी खुशी के लिए जो चाहे करो,

अपनी मस्ती के लिए किसी की भी जान ले लो।

एक मां की, एक अजन्मे बच्चे की मौत हमें यह सिखा गई,

मानव की मानवता को समझने की बुद्धि जाने कहां चली गई।

ऐसे युग में कैसे जी पाएंगे,

इन वफादार पशुओं की बली देकर,

क्या खुद को मानव कह पाएंगे?????

RituPosted byBeingcreativePosted inUncategorizedLeave a commenton “कसूर”Edit“कसूर”

“Age is Just a Number”

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“Age is no barrier. It is a limitation that we ourselves put on our minds…”
‘Jackie Joyner -Kerse’


What do you mean by age?
Most of the people answered: ‘It is that time of life at which one attains full personal rights and capacities’.

To bind ourselves to this meaning is our past. With time the meaning of ‘AGE’ has also changed. If you ask me, Age means
A-amiable
G-gaiety
E-easy on the eye
A person who is amiable , has a feeling of happiness and is easy on the eye defines ‘Age’. No matter what age it is. Since childhood we have been surrounded by a myth that you can’t do this you’re too old for this, you can’t do that because you’re too young for that. Why is it a compulsion for people above the age of 50 to wear ethnic clothes ,why can’t people above 50 have fun and thrill in their lives? Why can’t they wear their own choice of clothes? Why can’t they do things that amuse them?
In nut shell, according to the society wishes start coming to an end with time…
Many people think about how to live after 50, how to spend the rest of the days peacefully? They fear alot because of one thing and that one thing is “What will people say”….

I totally disagree with that. God has given us only one life. We won’t get another life to enjoy. Bollywood industry is full of dazzle. This doesn’t mean that only youngsters can get a chance. ‘Boman Irani’ is a well-known name and he started his career at the age of 41, noone stopped him.

“Justin hall” The pioneer blogger didn’t start in his twenties. I am sure the list goes on. What i wish to convey is –
We are not obedient to start anything new because the work that brings happiness is good. No age limit. We live more if we are happy.
The right age to live comes after 40 because before that we are stuck with responsibilities. So ,

“Live your life king size”

Do what your heart wants without caring about anyone or their opinions.

Wear whatever you like, read and write without worrying about age because

” Age is just a number”

When someone says that you are old say “No I am skilled”.

RituPosted byBeingcreativePosted inUncategorizedLeave a commenton “Age is Just a Number”Edit“Age is Just a Number”

THE JOURNEY BEGINS.

Hello readers

I’m Ritu Jain passionate about writing since my teens…I think it’s in my genes….I have started blogging as I want to step forward to explore myself…I would love to cater you with different yoners ….I can’t stick to one topic….You will be reading topics which you tend to experience in your day to day life. So be ready for a new journey with me where i will take you to an entirely different zone.Posted byBeingcreativePosted inUncategorizedLeave a commenton THE JOURNEY BEGINS.EditTHE JOURNEY BEGINS.Ritu JainBlog at WordPress.com.

:)

Published by Beingcreative

A homemaker exploring herself!!

10 thoughts on ““पिता”

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