“बिरयानी सी शादी”

आज मेरे लेख का विषय कुछ अटपटा लगेगा आपको और मैं कोशिश करूंगी कि आपको अपना मंतव्य समझा सकूं ।

बिरयानी का नाम लेते ही मुंह में तरह-तरह के स्वाद घुलने लगते हैं , तीखा , करारा और चटपटा सा । शादी भी तो बिरयानी की तरह ही मसालेदार और चटपटी है, जिसमें तीखा स्वाद भी है और करारापन भी। शादी से मेरा मानना है पति – पत्नी की वैवाहिक जिंदगी । जैसी बिरयानी में अलग-अलग प्रकार के मसाले डाले जाते हैं उसी प्रकार शादी में अलग-अलग प्रकार की भावनाओं का समावेश होता है । बिरयानी एक ऐसा पकवान है जिसमें जितनी अधिक सामग्री का उपयोग होगा उतना ही उसका स्वाद निखर कर आता है ऐसे ही शादी में भी जितनी ज्यादा सूझ- बूझ और आपसी तालमेल हो तो शादीशुदा जिंदगी भी संवर जाती है । यदि हम बिरयानी की हांडी को तेज आंच पर चढ़ाते हैं तो वह अच्छे से नहीं पकती और कभी-कभी तो जल भी जाती है उसी तरह यदि शादीशुदा जिंदगी को सम्मान और प्रेम की धीमी आंच पर नहीं व्यतीत करेंगे तो वह नीरस और बेस्वाद हो जाएगी ।

अच्छी बिरयानी बनाने की विधि से ही आपको पता चलेगा कि अच्छी शादी शुदा ज़िन्दगी कैसे बिताई जाती है ?

बिरयानी बनाने के लिए हांडि या कढ़ाई को चूल्हे पर चढ़ा कर उसमें छौंक लगाया जाता है जिसमें तरह-तरह के मसाले डाले जाते हैं फिर चावल की तह लगाई जाती है उसके ऊपर सब्जियों की परत लगाई जाती है , ऐसे ही दो तीन बार तह बिठाकर उसको ढक्कन से ढक कर दम दिया जाता है और आंच बिल्कुल धीमी कर दी जाती है जिससे वह धीरे – धीरे पकती रहे और मसाले अपनी खुशबू और स्वाद छोड़ते रहें ।

शादी में भी दूल्हा और दुल्हन को फेरों की वेदी पर बैठा कर सात वचनों का छौंक लगाया जाता है जिससे वह आजीवन एक दूसरे के साथ घुल मिलकर रहें । शादी के उपरांत बिरयानी की तरह ही गृहस्थ जीवन में तरह-तरह के मसाले यानी भावनाओं का समावेश होता है । एक दूसरे का ख्याल रखना, एक दूसरे का सम्मान , एक दूसरे से प्रेम , नोकझोंक , रूठना मनाना परंतु एक दूसरे के साथ घुल- मिल कर हर सुख – दुख में साथ निभाते हुए जीवन यापन करना ही एक सफल शादी का गुरु मंत्र है । बिरयानी की परतों की तरह ही वैवाहिक जीवन में रिश्तों का महत्व होता है जैसे माता – पिता , सास – ससुर , देवर – ननंद, साला – साली इत्यादि । अगर यह रिश्ते ना हो तो शादीशुदा जीवन फीका और नीरस लगने लगेगा ठीक वैसे ही जैसे बिना परतों के बिरयानी । जिस तरह बिरयानी को ढ़क कर पकाया जाता है उसी तरह शादी को भी परिवार रूपी ढ़क्कन के साथ ढ़क कर ही निभाया जाता है । (यहां ढक्कन का तात्पर्य आप गलत ना लें ) यदि बिरयानी ढ़क कर ना बनाई जाए तो उसके हंडिया से गिरने का डर रहता है , पकने में समय अधिक लगता है और चावल की नमी भी खत्म हो जाती है उसी प्रकार परिवार रूपी ढक्कन यदि साथ है तो वैवाहिक जीवन सुदृढ़ होता है , छोटी मोटी कमियां जग जाहिर नहीं होती , रिश्तों में आई हर ऊंच नीच संभल जाती है और पति – पत्नी के रिश्ते की नमी बरकरार रहती है । बिरयानी बिना दम दिए स्वादिष्ट नहीं बनती उसी प्रकार शादी रूपी बिरयानी में बच्चे दम का काम करते हैं जिनके बिना शादी अधूरी है । जिस प्रकार दम देने से बिरयानी की परतें एक दूसरे के साथ जुड़ उसे शानदार बनाती हैं वैसे ही बच्चे पति पत्नी को एक साथ बांधे रखते हैं जिनके बिना पति पत्नी का व्यक्तित्व अधूरा रहता है , बच्चों के सानिध्य से हमारी जीवन रूपी बगिया महकती रहती है । शादीशुदा जोड़े की गृहस्ती में मेहमान और मित्र गण का आना इलायची और सूखे मेवे के समान है जिनका बिरयानी में प्रयोग होने से वह और स्वादिष्ट बन जाती है । जैसे बिरयानी में हम और बहुत सी सामग्री डाल सकते हैं वैसे ही शादीशुदा जिंदगी में हम नाना प्रकार की भावनाओं और साझेदारीओं को समाहित कर उसे मनोरम बना सकते हैं ।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर हम बिरयानी के छौंक को चूल्हे पर चढ़ा कर भूल जाएंगे और कड़छी से नहीं हिलाएंगे तो वह जल जाएगा और बदबू पूरे घर में फैल जाएगी उसी प्रकार हमें शादीशुदा जिंदगी को प्रेम रूपी कड़छी से हिलाते रहना चाहिए जिससे आपसी रिश्ते ना तो जले , न ही उनमे तेज सेक लगे और न ही वह परिवार एवम् समाज में बदबू और धुंआ फैलाएं ।

अब मेरे पाठक मित्र समझ पाएंगे कि मैंने शादी को बिरयानी जैसा क्यों कहा । भगवान से यही प्रार्थना है कि आप सब की जीवन हांडी में शादी रूबी जो बिरयानी पक रही है उसमें सदा स्वाद और मिठास बनी रहे ।

Published by Beingcreative

A homemaker exploring herself!!

6 thoughts on ““बिरयानी सी शादी”

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