Everybody has a misconception that they know the meaning of trust . In common rather Google language trust means to have faith or belief in someone , but it’s not enough . To trust and being trusted has a vast meaning .Trust is like a shard of glass that once broken can’t be mend.

“The harder is to gain trust and easier is to break.”

Nowadays people build trust in accordance with their needs and choice . It is not the item mentioned in menu which can be ordered as per individuals taste n wish . If you trust somebody you have to give your hundred percent , it can’t be partial.
Trust itself state ,

T o

R ender

U rself

S heerly

T owards someone

Arjuna entrusted himself to Shri Krishna because he knew that he (Shri Krishna )won’t let him go the wrong way, this is ‘TRUST’.
In today’s scenario the most trustworthy relation is shared between a doctor and a patient who surrender himself completely with a belief that his saviour will not let him down .
As they say ,

“Whether it’s friendship or relationship all bonds are built on trust without it you have nothing . “

Trust is a fundamental to life . Relationships can’t last without trust . One needs to trust family , friends and people around you who are important . Life without trust would be life without oxygen .
It doesn’t imply that you blindly trust someone , you have to be careful and once trusted it’s done forever .

“Breaking someone’s trust is like crumpling a perfect piece of paper .You can smooth it over but it is never going to be the same again .”

Posted byBeingcreativePosted inUncategorizedTags:Article

Nominated for Real Neat Blog….


Hello and welcome to my FIRST Real Neat
Blogging award.

I am humbled of my community of bloggers and my loyal readers that they respects and thinks so highly of my creations. Thank you so much!!!

I am very happy and excited being nominated for the Real Neat Blog Award. I would sincerely like to thank to Dear ‘ Biswa Pratap Singh ji ‘ for nominating me for this award. I got this award for the very first time. I would also like to thank all my loyal readers and well wisher.

About the Real Neat blog..

The Real Neat Blog Award started in 2014 for bloggers whose blogs deserve more attention. So, This is an award within the blogging community – given to bloggers by their peers. This award since 2014 has been awarded to many bloggers and gone to many places of the blogosphere.

The Real Neat Blog Award 2020

Nominated the Real Neat Blog Award 2020

Rules for the Real Neat blog…

○Display the Award Logo.
○Thank the blogger who nominated you and post a link to their blog.
○Answer the seven questions of the one who nominated you.

Biswa Pratap Singh ask me these questions..

1)What is the best thing about yourself?

I would say the best thing about myself is that I am a fighter I always bounce back after rejection .I love to prove myself with my work.

2)What is that one thing which keep motivating you for blogging?

Addressing the problems of the world motivates me for blogging.

3)What was the most challenging moment in your blogging journey so far?

The most challenging moment would be the moment when I started blogging and didn’t knew much about it but readers and their blogs encouraged me to continue and here I am .

4)Do you have a particular cause that you are passionate about and why?

I would rather answer this in a hindi phrase
“” जब तक दिल में दर्द रहेगा , शब्दों को कागज पर उतारते रहेंगे “

5)Have you created videos (Vlogs) for your blog and/or social media accounts? Please share!

I have created many videos for social media accounts .Few are on my You tube channel.

6)Do you have any blog post which you didn’t like much but it is appreciated by your reader beyond your expectations?

No there isn’t any as all the posts I created are like my kids and the kids are so special.
Every post from ♥️ .

7)Would you encourage others to start a blog?

Yes of course , I have done that already .

My nominees…

2) लेखनालय
3) Daksali Gupta
4)Kumar Parma
5)SaaniaSparkle 🧚

My list of questions for them….

1) What was your experience when you wrote the very first blog .

2) Do the appreciation of fellow readers motivate you.

3) How can you define writing / blogging.

4) What is ur favorite yoner to create a blog post .

5) What is your inspiration behind blogging.

6)What kind of blogs draws your attention.

7) Which trait of you relates to blogging.

I do hope you enjoy reading my thoughts from my blog posts. Thank you so much for inspiring and encouraging me through your comments, likes and share. Thank you!!!

Share this:



Hello readers I’m Ritu Jain passionate about writing since my teens…I think it’s in my genes….I have started blogging as I want to step forward to explore myself…I would love to cater you with different yoners ….I can’t stick to one topic….You will be reading topics which you tend to…

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“Age is Just a Number”

With 1 comment

“Crunchy Uljhan”

In “Food”

“दक्षिण भारत”

प्यारे दोस्तों आज मैं आपको अपने एक और पहलू से रूबरू कराना चाहूंगी मुझे नाटक लिखना और उसका मंचन करना अति प्रिय है। आज आपके समक्ष प्रस्तुत है एक नाटक , आशा करती हूं मेरे लेख और कविताओं की भांति ही आपको यह पसंद आएगा। इस नाटक के द्वारा मैं किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहती परंतु समाज को एक विषय देना चाहती हूं सोचने के लिए ।

” रावण का स्वप्न “

नैपथ्य में सितार का स्वर , भरतनाट्यम करती कुछ कन्याएं, मंदिर के घंटे और शंख की दिल को मोह लेने वाली मधुर ध्वनी ।

सूत्रधार :::

आप पहुंच गए हैं दक्षिण भारत । हमारे नाटक की मूल पात्र है प्रीति जो बहुत वर्षों से दक्षिण भारत भ्रमण के लिए आना चाहती थी , अब जाकर उसकी इच्छा पूर्ण हुई।

प्रीति :::

वाह ! यह वाकई बहुत सुंदर प्रांत है, यहां कितनी हरियाली है , चारों ओर लहराते वृक्ष सुंदर-सुंदर पौधे और भीनी -भीनी खुशबू मन मोह लेती है। यहां के लोग पढ़ाई को कितना महत्व देते हैं। पढ़े लिखे होने के साथ-साथ यहां हर कोई सेवाभावी भी है। आज तो मैं बहुत थक गई , आपको पता है मैं आज कितने मंदिरों में गई ? अरे मंदिरों से याद आया यहां तो रजनीकांत का भी मंदिर है, एक फिल्म अभिनेता का मंदिर कमाल है !! और तो और पूरे भारतवर्ष में रावण को धिक्कारा जाता है परंतु दक्षिण भारत में रावण की पूजा अर्चना होती है, यहां रावण का मंदिर भी है , आश्चर्य है । कोई रावण की कैसे पूजा कर सकता है ? रावण कभी पूजनीय नहीं हो सकता ! मुझे अब सो जाना चाहिए (सोने का उपक्रम करना)

परंतु बार-बार मेरा ध्यान रावण के मंदिर की तरफ ही जा रहा है , यह बात मानने योग्य है ही नहीं , मैं गाइड की बात क्यों मानूं ? मुझे नहीं जाना रावण के मंदिर , जिसने जाना है जाए मुझे क्या फर्क पड़ता है।

सूत्रधार :::

प्रीति यह सब सोचते सोचते कब गहरी नींद में चली गई उसे पता ही नहीं चला नींद उसकी तब खुली जब उसे अट्टहास की ध्वनि आई ।

“”हा हा हा हा हा हा “”

सूत्रधार :::

प्रीति यह ध्वनि सुनकर पलंग से गिर गई । तभी वह धुंधली आकृति अपनी ओर आते देखती है ।


(डरते हुए) कौन है आप ? आप यहां क्या कर रहे हैं ? चले जाइए यहां से वरना मैं शोर मचा दूंगी ।

व्यक्ति :::

(गंभीर स्वर) अरे अरे, डरो मत , शांत हो जाओ मैं तुम्हें हानि नहीं पहुंचाऊंगा ।

प्रीति :::

(डरतेहुए) आखिर तुम कौन हो ? यहां क्या लेने आए हो?

व्यक्ति :::

अरररे , तुम ही तो मुझे याद कर रही थी, मेरे बारे में कितना सोच रही थी ,तुम्हें ज्ञात नहीं जिसके बारे में इतना चिंतन करो वही प्रत्यक्ष आ जाता है । मैं हूं लंकापति रावण ।

प्रीति :::

(घबराते हुए) र र र र रावण, मुझे छोड़ दो , मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? मुझे जाने दो।

रावण :::

डरो मत ।

प्रीति :::

(गुस्से में) तुम जैसे व्यक्ति से डरूं नहीं तो और क्या करूं ? चले जाओ यहां से।

रावण :::

(हैरान होकर) मुझ जैसा व्यक्ति ? मैंने क्या किया ?

प्रीति :::

(गुस्से में) अच्छा तुमने क्या किया ? सीता माता का हरण किसने किया था ? एक नारी का अपमान किसने किया था ?

रावण :::

(शांत स्वर) परंतु उस बात को तो सदियां बीत गईं , तुम आज भी उस बात को लेकर बैठी हो । मुझे तो उसका दंड भी मिल गया ।

प्रीति :::

(गुस्से में) तुमने सीता माता का अपमान किया था तुम्हें कभी इसके लिए माफ नहीं किया जाएगा ।

रावण :::

जब श्रीराम ने मुझे माफ कर दिया तो तुम क्यों नहीं मुझे माफ करोगी ? मैंने देवी सीता का अपहरण जरूर किया था परंतु कभी उनका अपमान नहीं किया। आदर सहित अपने महल की अशोक वाटिका में रखा, कभी अपनी मर्यादा नहीं भूला । मैंने तो यह सब अपनी बहन के अपमान का प्रतिशोध लेने के लिए किया था ।

मुझे एक बात बताओ कि तुम लोग हर वर्ष दशहरे पर मेरा पुतला क्यों जलाते हो ?


(निर्णायक स्वर) क्योंकि तुमने घोर पाप किया था ।

रावण :::

मैं मानता हूं मैंने पाप किया किया परंतु इतने वर्षों बाद भी मुझे उसकी सजा मिलती है ।,आज कितने ही लोग नारियों का अपमान करते हैं उनकी इज्जत के साथ खिलवाड़ करते हैं कितनी ही दामिनी और निर्भया मरती हैं परंतु उनके दोषियों को कुछ नहीं कहा जाता , क्यों , आखिर क्यों ?

अरे मैंने तो देवी सीता को कभी स्पर्श भी नहीं किया था , परंतु आज का मानव तो हर मर्यादा लांघ चुका है , स्त्री क्या आज तो वह छोटी-छोटी बालिकाओं को भी नहीं छोड़ता और अपनी हवस मिटाता है , ऐसे लोगों को तुम क्या कहोगी ? इनका पुतला तो नहीं जलाते तुम लोग ! जो मानवता की हर हद पार कर चुके हैं , वह तो तुम्हारी अदालतों से भी बच के निकल जाते हैं । मैंने केवल एक स्त्री का अपहरण किया तो मुझे मार दिया गया, सदियों से तुम लोग मुझे जलाते आ रहे हो । क्या मेरा कसूर आज के इन‌ वहशी दरिंदों से ज्यादा था ? मेरे तो कुल का समूल नाश हो गया परंतु आज के यह दानव तो खुलेआम घूमते हैं ।

प्रीति :::

(हिचकते हुए) हां आप बात तो सही कह रहे हैं , हमने कभी सोचा ही नहीं , आपकी बातें सुनकर तो लगता है कि आपका अपराध इतना बड़ा भी नहीं था ।

रावण :::

(पश्चाताप का स्वर) नहीं , मैं मानता हूं मैंने बहुत भयंकर अपराध किया और मैंने उसकी सजा भी भोगी , अपने वंश को अपनी आंखों के सामने खत्म होते देखा , खून के आंसू रोया मैं , प्रभु राम के हाथों से मुझे मुक्ति मिली , मैं कृतार्थ हो गया जब उन्होंने मेरे अंतिम समय में मुझसे ज्ञान मांगा ।

प्रीति :::

यह तो आप उचित कह रहे हैं , आप तो प्रकांड पंडित थे शायद तभी दक्षिण भारत में आप की पूजा होती है ।

रावण :::

मैं नहीं चाहता लोग मेरी पूजा करें , मैं केवल इतना चाहता हूं कि जो सजा मेरे अपराध की मुझे मिली उससे बड़ी सजा बलात्कारियों को मिलनी चाहिए , जो ना जाने कितनी जिंदगियां तबाह कर बच के निकल जाते हैं । आपको रावण का पुतला जलाने की आवश्यकता नहीं है अपितु उचित न्याय व्यवस्था की आवश्यकता है , नारी को उचित सम्मान देने की आवश्यकता है । अपराधियों के मन में डर पैदा करने की आवश्यकता है ।
आज के रावण को अगर मारना है तो भगवान श्रीराम जैसा होना पड़ेगा । क्या उस योग्य हो ???

नेपथ्य में यह ध्वनि गूंजती रही क्या आप उस योग्य हो? क्या आप राम हो ? क्या आप राम बन सकते हो? प्रीति हड़बड़ा कर उठ गई ।

प्रीति :::

यह कैसा स्वप्न देखा मैंने ? आज मैं रावण की व्यथा को समझ पाई , उन्होंने तो सीता माता का हरण केवल प्रतिशोध लेने के लिए किया था , परंतु आज के अनाचारी तो कुंठित मानसिकता रखने वाले पिशाच हैं , जो संवेदनशून्य हैं , जो यह कुकृत्य अकारण ही करते हैं , क्या ऐसा करने से वह मर्द परिभाषित होंगे ?

सूत्रधार :::

आवश्यकता है श्री राम के पद चिन्हों पर चलने की , न्याय व्यवस्था बदलने की यदि ऐसा हो जाए तो हर नारी सुरक्षित हो जाएगी, जरा विचार कीजिए ।

!! समाप्त !!


Our life is like a song ,
What is right and what is wrong,
We never get to know,
Sad and happy, fast and slow,
In a life time we meet them in one go,
It’s like a rainbow,
There are times when the colours are bright,
Sometimes there is dark night,
Sometimes we have to be stern
And sometimes we have to bow ,
It’s like a ship which in all condition has to row,
No matter how it’s to and fro ,
We are here to just go go go and go….

” नारी “

कोमल है कमजोर नहीं पर शक्ति का नाम ही नारी है!!!!

नारी कौन है ? नारी क्या है ? नारी कैसी है ?

यह सवाल सोचने योग्य हैं, पर क्या हम सोच पाते हैं?
हम सिर्फ नारी को भोग की वस्तु ,उपयोग की वस्तु ही समझते हैं, हम सिर्फ नारी को बेटी ,बहन,बीवी और मां ही समझते हैं । नारी इन नामों से कहीं अधिक है , वह एक सक्षम और सम्पूर्ण व्यक्तिव है ।
केवल आज से ही नहीं नारी सदियों से अलग अलग तरह से जानी गई है, अलग-अलग नामों से पहचानी गई है, पर हम समझना नहीं चाहते । क्या द्रौपदी सखी नहीं थीं भगवान कृष्ण की ?? सक्षम भी थीं और संघर्ष भी करती थीं, वह अपने पांच पतियों को आदर और प्रेम सहित सलाह भी देती थीं, वह उनकी प्रेरणा थीं, वह समाज के लिए एक उदाहरण बनीं ,उन्होंने उस युग में भी हर स्त्री को सिखाया कि अगर तुम पर कोई अत्याचार होता है तो चुप मत बैठो आवाज उठाओ और प्रतिकार करो।
आज की नारी भी सक्षम , संघर्षरत और सलाहकार है। आज की नारी घर ,दफ्तर और यहां तक कि देश भी चलाना जानती है। परन्तु आज भी अधिकांश घरों में नारी के साथ दुर्व्यवहार होता है । आज नारी के इतनी शक्तिशाली और प्रतिभाशाली होने के बावजूद भी उसकी आवाज दबा दी जाती है , उसे मजबूर किया जाता है चुप रहने के लिए । आज के इस आधुनिक युग में भी 70% लोग नारी को किसी न किसी प्रकार से उपभोग की ही वस्तु मानते हैं । धरेलू हिंसा गांवों में ही नहीं आधुनिक शहरों में भी आम बात हो गई है । देवी मां की तो हर कोई पूजा करता है क्या वह नारी नहीं ? आज की नारी भक्ति नहीं चाहती वह केवल सम्मान की अभिलाषी है । वह परिवार की सुदृढ़ नींव भी है और उसकी धुरी भी , वह कोमल भी है और जरूरत पड़ने पर कठोर भी ।

नारी का जीवन केवल व्यतिक्रम,
नारी का जीवन केवल भ्रम,
एक ओर दुशासन खड़ा हुआ ,
एक ओर मेरी अग्नि परीक्षा ,
समाज को शिक्षा देने को ,
क्यों मेरा उपयोग हुआ ??
मैं कहीं नहीं अधनातन थी ,
मैं नारी नहीं मैं साधन थी ,
मैं नारी नहीं मैं साधन थी ??

अब उन तीन सवालों पर आपका ध्यान केंद्रित करना चाहती हूं जो मैंने सर्वप्रथम आपके समक्ष रखे थे ,
नारी क्या है – जो कभी ना हारी वह है नारी ।
नारी कौन है – नारी शक्ति है ।
नारी कैसी है – नारी भावनाओं का महासागर है ।
यदि आज का नर कभी ना हारी इस शक्ति की भावनाओं के महासागर को समझ लेता है तो जीवन कितना सुखद होगा । जीवन जीना सरल हो जाएगा । जरा सोचिए!!!!!


Why we are being judged
by our mien ?
We are not presentable,
if we are plumpy,
If we are timid ,
we are grumpy
If we are lean ,
Oh ! you will blow with the wind ,
If we are dark ,
We are termed as stark .

Excuse me….

We are happy with our own self ,
We are not Delph .
Which you can smash ,
We are not a piece of trash.
Now we care a damn ,
We hate to be sham .
Leave us or love us ,
Kindly don’t judge us…..

“आज की शिक्षा “

आजकल बच्चों की शिक्षा ही सर्वोपरि विषय बन गया है , स्कूल , कॉलेज की फीस और ऑनलाइन क्लासेस बस यही चर्चा है । स्थिति का कोई भी निष्कर्ष निकालकर निर्देश दिए जा रहे है । बहुत से लोग अलग-अलग माध्यम से अपनी राय दे रहे हैं, वैसे भी सलाह देना तो भारतीयों का जन्म सिद्ध अधिकार है , चाहे किसी बात का ज्ञान हो या ना हो सलाह देने में हम सर्वोपरि रहते हैं, क्योंकि यही तो एक चीज है जिस के दाम नहीं लगते ‌।
स्कूल को शिक्षा मंदिर कहा गया है , आज के परिपेक्ष में क्या यह सही है ? क्या अध्यापकों की मनमानी सही है ? क्या अभिभावकों की मनमानी सही है?क्या सरकारों का हस्तक्षेप करना जरूरी नहीं ? क्या शिक्षा को एक पैसा कमाने का जरिया बनाना सही है ?
आप कहेंगे ऐसा तो सदियों से चला रहा है , परंतु आज के इस दौर में यह तथाकथित शिक्षा मंदिर सिर्फ अपने फायदे के बारे में सोच रहे हैं । यदि यह कुछ माह की फीस नहीं लेंगे तो क्या यह संस्थान बंद हो जाएंगे ? इतने सालों से आप इतना पैसा कमा रहे हैं अगर आप निशुल्क शिक्षा प्रदान करेंगे तो क्या आपका ज्ञान खत्म हो जाएगा ? समय की मांग के अनुसार अगर अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ ना डालकर बच्चों की पढ़ाई अपने ही स्कूल के कोष ( जो कि अभिभावकों द्वारा ही लिया जाता है )से करवा देंगे तो क्या भूचाल आ जाएगा ? किसी को भी परवाह है बच्चों की ? अभिभावकों पर भी यही दबाव रहता है कि इतना पैसा खर्च कर रहे हैं तो बच्चा हमारी मर्जी से पढ़ें कुछ बने , क्या यह गलत नहीं ?
यह सब जिनके लिए किया जा रहा है क्या किसी ने उन बच्चों की राय , इच्छा और खुशी जानने की कोशिश की?आज भारतीय बच्चों पर पढ़ाई का इतना बोझ है परिवार की इतनी अपेक्षाएं हैं कि वह कई बार गलत पथ पर निकल जाते हैं , कुछ मानसिक दबाव झेल लेते हैं और कुछ अपनी जीवन लीला ही समाप्त करना सरल समझते हैं, क्या उसमें हमारा कसूर नहीं ? कहा जाता है,

“बच्चे भविष्य की नींव है”

परंतु हम उन्हीं के साथ खिलवाड़ करते हैं। अभिभावक अपने सपने बच्चों पर थोपते हैं , लोगों को दिखाने के लिए बच्चों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाया जाता है , बच्चे का मन अगर कलम पकड़ने का और लेखन करने का है तो वह छीन कर उसे स्टैथोस्कोप थमाया जाता है । अध्यापक भी बच्चों पर यही दबाव बनाते हैं कि अच्छे नंबर नहीं लाओगे तो कुछ नहीं कर पाओगे । प्रत्येक बच्चा क्या एक समान होता है ?
आज भारतीय बच्चे विदेशों में जाकर पढ़ना क्यों चाहते हैं?
वहां पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ नहीं है, बच्चों की इच्छाओं के अनुरूप पाठ्यक्रम बनाए जाते हैं , केवल चार पांच विषय बच्चों की रुचि के अनुसार ही पढ़ाए जाते हैं , पढ़ाई को थोपा नहीं जाता। शिक्षा से मित्रता सिखाई जाती है ।
यूं तो हम काफी आधुनिक हो गए हैं, हमें पाश्चात्य देशों से काफी कुछ अपनाया परंतु अपनी मर्जी के मुताबिक। वहां का खाना, व्यंजन , पहनावा, कार्यप्रणाली, प्रौद्योगिकी।
परंतु हम अत्यावश्यक बात अपनाना तो भूल ही गए।
वह क्या है?
वह है हमारे देश के बच्चों के भविष्य एवं शिक्षा के पथ पर उठाए गए कदम । यदि हम अपनी संतानों का उज्जवल भविष्य चाहते हैं तो आज एक नई कार्यप्रणाली की आवश्यकता है , अभिभावकों और अध्यापकों को एकजुट होकर अपने बच्चों के लिए कुछ निर्णय लेने होंगे, नूतन विषय लाने होंगे, पढ़ाई को बोझ ना बनाकर मनोरंजक बनाना होगा।
जहां कुछ बच्चे आज अपनी रुचि को अपना कर आगे बढ़ रहे हैं जैसे कि कुछ गायकी और लेखन कर रहे हैं, कुछ यूट्यूबर और ब्लागर हैं , परंतु 80% बच्चे आज भी अपने माता-पिता और समाज की अपेक्षाओं की बलि चढ़ अपनी इच्छाओं के विपरीत कार्य कर रहे हैं। आज आवश्यकता है सब को एकजुट होकर बच्चों का भविष्य संवारने की । याद रहे बच्चों को केवल साथ की आवश्यकता होती है रास्ता वह खुद ही ढूंढ लेते हैं, उन्हें केवल विश्वास की आवश्यकता है मंजिल वह स्वयं ही प्राप्त कर लेते हैं । उनकी चंचलता और निश्चलता को सजीव रखने के लिए उनका मार्गदर्शन करें, उनकी इच्छाओं और भावनाओं का सम्मान करें। अपनी जीवन भर की इस पूंजी को बिखरने ना दें ।

” किसी ने भी अभी तक पूरी तरह से बच्चे की आत्मा में छुपे सहानुभूति, दया और उदारता के खजाने को नहीं जाना है। वास्तविक शिक्षा का प्रयास उस खजाने को खोलना होना चाहिए “


Friends I want to tell u about my passion other than writing and that’s’ COOKING’. I love to cook a lot of cuisines in different styles with a tinch of my creativity ,but initially it was not like that as I was married at 18 and cooking was altogether a biggest fear for me. I considered it as my responsibility and started cooking without putting my heart in it until I heard a saying in Hindi ,

“जब दिल से कुछ पकता है तो दिल तक पहुंचता है और तृप्त करता है ।”

I grasped that mantra .It helped exploring a chef in me. Now cooking became my hobby and I started enjoying it.As time went by I was appreciated for my cooking skills.It made me more confident and I tried my hands on different recipes . I started mending dishes. As they say,

“The one who fixes the spoiled food is a cook”

One fine day few guests n family were on the breakfast table and my servant spoiled a simple dish “Poha”.

Though we had a lot of things to eat but to waste a huge amount of Poha was my concern and how can I serve d spoiled dish??
My chef cap tickled with an idea and I prepared a snack using that poha .After tasting it everybody started assuming the ingredients .Their normal discussion switched off to the ingredients of ‘The new snack’ as I belong to a foody family . My smile got wider n I was conteded as they relished it. Today I will share that recipe which had a vast discussion without result .
So here we go..

Ingredients ::

Cooked veg poha: one bowl
Boiled potatoes:3 to 4
Green chillies:1 to 2
Corriander leaves:5to 6
Salt:as per taste
Chilli powder:1/4th tsp
Oregano:1/4th tsp
Dry corriander powder:1/4th tsp
Oil for frying

How to cook::

Take cooked poha and grind it in the mixer, add peeled potatoes and give them a churn as well. Now take out the batter from the mixer in a bowl. Add all the spices ,chilles and coriander leaves….. Make a dough ….Now grease your palms with little oil and take a portion of the batter and roll it between your palms like a ball… After making all the balls slightly flatten them and keep it in the refrigerator for half an hour. Now take out the balls and fry Dem on medium flame.. Serve hot with tomato ketchup and mint chutney…. Enjoy your snack..
This is a recipe from a home maker. You can give it a suitable name as per your choice but I named it “CRUNCHY ULJHAN”.

“Neophyte became a Culinarian”


तस्वीरें खामोश रहकर भी बहुत कुछ कह जाती हैं,
यह जिंदगी के बीते पलों को समेट लाती हैं ।
जब भी इन्हें उठा कर देख लो,
ये हमें कुछ ना कुछ बताती हैं,
हमारे ही बीते दिनों की कहानी हमें ही सुनाती हैं।
कभी आंखों में चमक ,
कभी होठों पर मुस्कान दे जाती हैं,
कुछ खट्टी कुछ मीठी यादों को ताजा कर जाती हैं।
कभी बचपन से मिलवा जाती हैं,
कभी जवानी से रूबरू कराती हैं।
जीवन के कई किस्सों को ,
हमारे ही कई हिस्सों को,
हमसे ही मिलवा जाती है ।
इस भाग दौड़ भरी दुनिया में,
हमारी थकन को कम कर जाती है ।
हमारी नीरस सी जिंदगी में ,
कुछ रंग मतवाले से बिखरा जाती हैं ।
कुछ छूटे रिश्तों को ,
कुछ रूठे चेहरों को फिर से मिलवाती हैं ।
कभी-कभी इन्हें देख कर,
आंखें भी भर आती हैं ।
पहले ढूंढने में मेहनत लगती थी ,
अब तो एक स्पृश से ही आ जाती हैं ।
ये तस्वीरें …….
खामोश रहकर भी बहुत कुछ कह जाती हैं,
बहुत कुछ कह जाती है!!!


Who am I ?
I am a bird whose wings are chopped ,
I am a picture that is cropped ,
Only to satisfy others ??

Who am I ?
I am a musical note which is lost,
I am a jewel without any cost,
Only to please others ??

It can not happen now,
I will not allow,

I want to fly,
I want to enjoy,
I want to be heard,
I want to be loved….

In this vast world ,
I want a petite space,
I want solace ,
I don’t want to chase…..

I want to breathe,
Breathe in the air which is pure,
I want to know myself
The way I haven’t before……

I want to b like a sea shore,
That loves to be with its waves,
I want to explore,
I don’t want anything more……

You can never loose hope,
You just have to try,
To find the answer for
Who am I ??

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