” आंसू “

खारे खारे से आंसू ,एक सशक्त सहारे आंसू ,काश तुम बोल पाते ,मन की गिरह खोल पाते ,यूं तो अविरल बहते जाते हो ,हर सुख – दुख में साथ निभाते हो ,किसी पर हुए अन्याय को सह ना पाते हो ,मन के कृंदन को तुम्ही तो दर्शाते हो ,पर कुछ कह क्यों ना पाते होContinue reading “” आंसू “”

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